
ओपनएआई के साथ साझेदारी से शिक्षण, शोध और छात्र अनुभव मे होगा बड़ा बदलाव….
यूपीईएस ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए खुद को ‘AI-First’ विश्वविद्यालय घोषित कर दिया है। ओपनएआई के सहयोग से अब संस्थान अपने पूरे कैंपस में ChatGPT Edu लागू करेगा, जिससे छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ को अत्याधुनिक एआई टूल्स मिलेंगे।
इस पहल से यूपीईएस कैंपस में पढ़ाई और शोध का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। जो सिलेबस और सेमेस्टर के हिसाब से पढ़ाई में मदद करेगा। इसके साथ ही मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट, प्रैक्टिस गाइडेंस और विषयों की गहराई से समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी।
यूनिवर्सिटी ने एआई के उपयोग के बावजूद असेसमेंट की विश्वसनीयता बनाए रखने पर भी फोकस किया है, ताकि छात्र अपनी वास्तविक समझ और क्षमता साबित कर सकें।
नई एआई आधारित स्टूडेंट सर्विसेज छात्रों को नीतियों की जानकारी, स्टेप-बाय-स्टेप गाइडेंस और जरूरत पड़ने पर मानव सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करेंगी।
संस्थान ने डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए एक स्पष्ट ‘Responsible AI Charter’ भी तैयार किया है
छात्रों और शिक्षकों को डीप रिसर्च मॉडल्स तक पहुंच मिलेगी, जिससे गहन अध्ययन और एडवांस्ड रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। इससे छात्रों की जॉब रेडीनेस और प्लेसमेंट में भी बढ़त मिलने की उम्मीद है।
वही UPES के वाइस चांसलर डॉ. सुनील राय ने कहा कि यह पहल एआई को शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जहां हर छात्र और शिक्षक के लिए एआई साक्षरता बुनियादी हिस्सा होगी।इतना नही आने वाले निकट भविष्य में AI दुनिया भर में देश की सुरक्षा में भी एहम भूमिका निभाएगा, जिससे न केवल सुरक्षा बल्कि इंटेलिजेंस के लिए भी मददगार साबित होगा।।
वहीं राघव गुप्ता ने कहा कि भारत में ChatGPT का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और यूपीईएस की यह पहल छात्रों को भविष्य की एआई-प्रधान दुनिया के लिए बेहतर तैयार करेगी।
यूपीईएस का यह कदम न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है, जहां एआई अब सिर्फ एक टूल नहीं बल्कि शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है।




