
देहरादून पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शहर में शरण लेकर रह रहे एक बांग्लादेशी युवक और उसकी भारतीय पत्नी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि मूल रूप से बांग्लादेश के रहने वाले ममून हसन ने देहरादून की रीना चौहान की मदद से आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे भारतीय दस्तावेज तैयार करा लिए थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि रीना ने अपने पहले पति सचिन चौहान—जो नौकरी के चलते दूसरे शहर में रहता है—उसी के नाम का इस्तेमाल करके ममून के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि रीना पहले बांग्लादेश गई, वहाँ ममून से निकाह किया और उसके बाद दोनों अवैध तरीके से सीमा पार कर भारत में आ गए। वर्ष 2022 से ये दोनों देहरादून में पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।
पुलिस का कहना है कि मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
आखिर बिना सत्यापन के बीएलओ ने कैसे वोटर आईडी कार्ड जारी कर दिया?
कैसे आधार और पैन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार हो गए?
जांच अधिकारियों का मानना है कि अगर समय रहते यह फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आता तो संभव था कि इन नकली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट भी बन जाता। यह घटना दिखाती है कि सीमापार से आने वाले लोग किस आसानी से यहाँ पहचान बदलकर बस रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी बिना जांच-पड़ताल के अपनी कलम चला रहे हैं।
पुलिस अब फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले चैनल, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और घुसपैठ के नेटवर्क की भी जांच कर रही है। मामले ने सुरक्षा व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।




