
प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष आर्येंद्र शर्मा ने देहरादून-हिमाचल मार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पुल की क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड की मरम्मत में संभावित तकनीकी अनियमितताओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मरम्मत कार्य में निर्धारित तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है, जिससे भविष्य में सड़क धंसने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि बाढ़ या नदी के कटाव से क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड की मरम्मत केवल मिट्टी भरकर नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और Indian Roads Congress (IRC) के मानकों के अनुसार तकनीकी निरीक्षण, एम्बैंकमेंट पुनर्निर्माण, लेयर-वाइज कम्पेक्शन, ढलान सुरक्षा, समुचित ड्रेनेज व्यवस्था और गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही सड़क को यातायात के लिए खोला जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन मानकों का पालन किए बिना जल्दबाजी में केवल मिट्टी भरने का कार्य किया गया है, जो भविष्य में पुनः कटाव और गंभीर हादसों का कारण बन सकता है।
कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ समिति से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि संयुक्त निरीक्षण की तकनीकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मरम्मत कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।
उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने, यदि अनियमितताएं मिलती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने तथा जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि देहरादून और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और तकनीकी मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।




