
नीट-यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि कूटरचित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्रों के आधार पर तीन अभ्यर्थियों को अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला दिलाया गया।
जांच में सामने आया है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने और उन्हें जारी कराने की प्रक्रिया में पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम स्तर तक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अब संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका या लापरवाही तो नहीं थी। हालांकि, अभी किसी अधिकारी की संलिप्तता साबित नहीं हुई है और जांच जारी है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी रूपेश पंडित एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम करता था

पूछताछ में सामने आया कि तीन अभ्यर्थियों के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए और प्रत्येक एमबीबीएस दाखिले के एवज में करीब 45 लाख रुपये लिए जाने की बात सामने आई है। परिजनों से एडवांस के तौर पर 20-20 लाख रुपये लिए जाने की भी जानकारी पुलिस को मिली है।
मामले की जांच एसआईटी की प्रभारी एसपी जया बलूनी के नेतृत्व में चल रही है। एसपी के मुताबिक इस पूरे प्रकरण की सभी कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रमाण पत्र बनाने से लेकर उसके आधार पर दाखिला लेने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। जांच में यदि किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एसआईटी अब फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।


