उत्तराखंडदेहरादून

डीपीडीपी एक्ट से सूचना के अधिकार की प्रभावशीलता पर उठे सवाल,6 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने रखे तर्कपूर्ण विचार

सूचना के अधिकार की प्रभावशीलता और व्यक्तिगत निजता की सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर आरटीआई क्लब उत्तराखंड की ओर से अंतर-महाविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में छह शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग कर डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act), 2023 और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। प्रतियोगिता में उत्तरांचल विश्वविद्यालय की आर्य सिंह ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि इसी विश्वविद्यालय की आयुषी चौधरी द्वितीय स्थान पर रहीं।

प्रतियोगिता का विषय था— “DPDP Act के अधिनियमन ने सूचना का अधिकार अधिनियम की प्रभावशीलता को कमजोर किया है।” इस दौरान विद्यार्थियों ने निजता के अधिकार, जनहित से जुड़ी सूचनाओं तक नागरिकों की पहुंच, सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तर्क प्रस्तुत किए।

प्रतियोगिता में UPES, उत्तरांचल विश्वविद्यालय, आईएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय, जिज्ञासा विश्वविद्यालय, डीएवी पीजी कॉलेज और लिब्रा कॉलेज ऑफ लॉ के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के तर्क, विषय की समझ, प्रस्तुति और विचारों की स्पष्टता के आधार पर परिणाम घोषित किए। कशिश पुष्कर और लक्ष्मी रतूड़ी संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहीं, जबकि जिज्ञासा विश्वविद्यालय की अवंतिका प्रजापति और डीएवी पीजी कॉलेज की समीक्षा गुप्ता ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम में पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने सूचना के अधिकार को नागरिकों के लिए शासन-प्रशासन से सवाल पूछने और जनहित से जुड़ी जानकारी हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही के साथ व्यक्तिगत निजता की सुरक्षा भी जरूरी है। दोनों के बीच उचित संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

आरटीआई क्लब उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. बी.पी. मैथाणी ने कहा कि निजता और पारदर्शिता लोकतंत्र के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने सूचना आयोगों में रिक्त पदों, लंबित अपीलों और प्रशासनिक जवाबदेही जैसी चुनौतियों का समाधान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार को प्रभावी बनाने के लिए कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ व्यवस्था में सुधार भी जरूरी है।

क्लब के संरक्षक डॉ. एस. फारूक ने विजेताओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें उपहार प्रदान किए। विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न आगामी कार्यक्रम में दिए जाएंगे। कार्यक्रम का संचालन अजय नारायण शर्मा ने किया। समापन पर उन्होंने कविता पाठ भी प्रस्तुत किया। क्लब की उपाध्यक्ष रीता सूरी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत कर अतिथियों, निर्णायकों, प्रतिभागियों और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

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