उत्तराखंडदेहरादून

VVIP दौरे और ट्रैफिक जाम के बीच पिसता देहरादून,जनता पूछ रही कब मिलेगी जाम से निजात

राजधानी देहरादून में ट्रैफिक जाम अब शहरवासियों की रोजमर्रा की परेशानी बन चुका है। जिले में आने वाले लगभग हर नए डीएम और एसएसपी के सामने शहर को जाम से निजात दिलाना बड़ी चुनौती के तौर पर सामने आती है और समय-समय पर इसके लिए दावे और योजनाएं भी बनाई जाती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि दून की सड़कों पर जाम की समस्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती नजर आ रही है। कभी पर्यटन सीजन, कभी कांवड़ यात्रा और कभी वीवीआईपी मूवमेंट के चलते शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। बाकी बचे समय में भी आम दिनों का ट्रैफिक लोगों के लिए परेशानी का सबब बना रहता है।

बुधवार को देहरादून के एफआरआई में उपराष्ट्रपति का कार्यक्रम था। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कैंट रोड को जीरो जोन किया गया और वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात को रोका गया। वीवीआईपी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा एजेंसियों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना भी जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही बड़ा सवाल यह है कि क्या देहरादून जैसे सीमित सड़कों वाले शहर में वीवीआईपी मूवमेंट से काफी पहले यातायात रोकना आम जनता के लिए परेशानी को और नहीं बढ़ाता?

खासकर उस समय जब शहर में लोग अपने दफ्तरों से घर लौट रहे होते हैं और सड़कों पर पहले से ही वाहनों का भारी दबाव रहता है। एक प्रमुख मार्ग के बंद होने का असर देखते ही देखते आसपास की सड़कों पर दिखाई देने लगता है। वाहन रेंगने लगते हैं और कुछ ही देर में कई इलाकों में लंबा जाम लग जाता है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जिन्हें समय पर घर पहुंचना होता है।

सुरक्षा के साथ जनता की सुविधा भी जरूरी

सवाल वीवीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था पर नहीं, बल्कि उसकी टाइमिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर है। क्या वीवीआईपी कार्यक्रमों की योजना बनाते समय स्थानीय ट्रैफिक की स्थिति और पीक ऑवर को ध्यान में नहीं रखा जा सकता? क्या प्रशासन के पास ऐसे वैकल्पिक इंतजाम नहीं होने चाहिए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे और आम लोगों को घंटों जाम में न फंसना पड़े?

देहरादून अब पहले जैसा छोटा और कम ट्रैफिक वाला शहर नहीं रहा। लगातार बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और संकरी होती सड़कों के बीच शहर की यातायात व्यवस्था पहले ही दबाव में है। ऐसे में जब भी किसी बड़े वीवीआईपी का दौरा होता है तो सामान्य ट्रैफिक व्यवस्था पर इसका असर कई गुना बढ़ जाता है।

बढ़ते राजनीतिक दौरों ने बढ़ाई चुनौती

पिछले कुछ समय में देहरादून में राजनीतिक और वीवीआईपी गतिविधियां भी लगातार बढ़ी हैं। केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय नेताओं और दूसरे विशिष्ट लोगों के कार्यक्रम राजधानी में लगातार होते रहते हैं। बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा कारणों से यातायात डायवर्ट या रोका जाता है, लेकिन इनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।

एक तरफ सरकार राजधानी को आधुनिक और स्मार्ट बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ शहरवासी घंटों जाम में फंसे नजर आते हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या वीवीआईपी दौरों के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित नहीं की जा सकती, जिससे सड़क मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव न्यूनतम हो?

क्या हर वीवीआईपी दौरे में सड़क ही विकल्प है?

देहरादून की भौगोलिक और यातायात परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन को वीवीआईपी मूवमेंट की योजना बनाते समय वैकल्पिक विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। यदि किसी कार्यक्रम में बदलाव संभव नहीं है और सड़क मार्ग से आवाजाही के कारण बड़े इलाके में ट्रैफिक प्रभावित होता है, तो सुरक्षा और प्रोटोकॉल के दायरे में हेलीकॉप्टर या अन्य वैकल्पिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, इस पर भी मंथन होना चाहिए।

जाम में फंसती एम्बुलेंस, मरीजों की जिंदगी पर मंडराता खतरा

VVIP मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक रोकने या डायवर्ट किए जाने का असर सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं रहता। कई बार जाम में एम्बुलेंस भी फंसी नजर आती हैं, जिनमें गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचने के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे होते हैं। वीवीआईपी सुरक्षा के चलते सड़क पर कुछ समय के लिए यातायात रोक दिया जाता है, लेकिन उसी दौरान अगर किसी एम्बुलेंस को रास्ता नहीं मिल पाता तो मरीज को अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी गंभीर मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है

कब बदलेगी राजधानी की तस्वीर?

देहरादून में जाम की समस्या नई नहीं है। हर साल ट्रैफिक सुधारने के लिए नए प्लान बनते हैं, नए दावे होते हैं और नई व्यवस्थाएं लागू की जाती हैं, लेकिन सड़कों पर हालात जस के तस नजर आते हैं। अब जरूरत सिर्फ जाम से निपटने के दावों की नहीं, बल्कि ऐसी दीर्घकालिक यातायात नीति की है जिसमें आम दिनों के ट्रैफिक के साथ-साथ वीवीआईपी मूवमेंट, पर्यटक सीजन और धार्मिक यात्राओं के दौरान पैदा होने वाले अतिरिक्त दबाव को भी शामिल किया जाए।

क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि वीवीआईपी को कितनी सुरक्षित तरीके से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाया गया, सवाल यह भी है कि उस दौरान सड़क पर फंसे आम आदमी को कितनी परेशानी हुई।

दूनवासियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो फ़ोटो शेयर कर बयां की अपनी परेशानी

आज देहरादून के तमाम व्हाट्सऐप ग्रुप और सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म पर जाम के वीडियो फ़ोटो के साथ लोग अपना दर्द बयां करते नजर आए हालांकि राजधानी के लोगों को अब अधिकारियों के दावों से ज्यादा ऐसे इंतजाम की जरूरत है, जिसमें वीवीआईपी सुरक्षा भी कायम रहे और आम दूनवासी सड़क पर घंटों जाम में फंसने को मजबूर भी न हो।

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