उत्तराखंडदेहरादून

चार साल तक न्याय के लिए पुलिस दफ्तरों में भटकता रहा पिता,न्यायालय के आदेशों पर हुए मुकदमा दर्ज करने के आदेश

देहरादून। एक पिता अपने बेटे की मौत के बाद करीब चार साल तक न्याय के लिए दर-दर भटकता रहा। कभी पुलिस चौकी, कभी एसएसपी कार्यालय में अधिकारियों के चक्कर काटे, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार अदालत का दरवाजा खटखटाने पर उसे राहत मिली। पंचम अपर सिविल जज (एसडी) देहरादून ने नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस को आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं।

पीड़ित पिता मेनपाल ने अदालत को बताया कि 3 जुलाई 2022 को उनके बेटे गौरव कुमार का सड़क हादसा हो गया था। हादसे में उसके दाहिने हाथ और गुर्दे में गंभीर चोट आई थी। उसे इलाज के लिए ऋष्पना पुल स्थित प्रसाद मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि अस्पताल में समय पर ऑपरेशन नहीं किया गया। जब परिजनों ने देरी का कारण पूछा तो कहा गया कि बाहर से डॉक्टर बुलाना पड़ेगा।

पीड़ित पिता के अधिवक्ता शिवा वर्मा


याचिका के मुताबिक 5 जुलाई को बेटे की हालत बिगड़ने लगी तो परिजनों ने उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कही, लेकिन डॉक्टर ने डिस्चार्ज देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि पहले हाथ का ऑपरेशन किया गया, जबकि सबसे गंभीर चोट गुर्दे में थी। बाद में गुर्दे का ऑपरेशन भी गलत तरीके से कर दिया गया। 8 जुलाई 2022 को जब हालत बेहद गंभीर हो गई तो डॉक्टर ने खुद दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा। परिजन बेटे को सिनर्जी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां करीब ढाई घंटे बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बेटे की मौत के बाद पिता ने न्याय की लड़ाई शुरू की। 24 सितंबर 2022 को उन्होंने पुलिस चौकी में शिकायत दी, लेकिन शिकायत तक दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने एसएसपी देहरादून से गुहार लगाई। एसएसपी के निर्देश पर 19 नवंबर 2022 को मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय को भेजा गया।


करीब डेढ़ साल चली जांच के बाद 1 जुलाई 2024 को जांच पूरी हुई। जांच रिपोर्ट में अस्पताल से जुड़े लोगों की लापरवाही सामने आने की बात कही गई। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने भी एक डॉक्टर को दोषी मानते हुए उसका पंजीकरण 90 दिनों के लिए निलंबित किया, जबकि अन्य संबंधित डॉक्टरों को चेतावनी दी गई।
इसके बावजूद पीड़ित पिता का आरोप है कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। उन्होंने 12 अगस्त 2024 और बाद में भी कई बार एसएसपी और पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने अदालत में धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत याचिका दाखिल की।

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पीड़ित पिता के अधिवक्ता शिवा वर्मा ने बताया कि मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया जांच का आधार मौजूद है। अदालत ने नेहरू कॉलोनी थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि शिकायत में बताए गए तथ्यों के आधार पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए और की गई कार्रवाई की जानकारी न्यायालय को दी जाए।

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