
उत्तराखंड ऊर्जा विभाग और पिटकुल (PTCUL) में एमडी पद की चयन प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरटीआई/सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनहित याचिकाकर्ता अनिल चंद्र बलूनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऊर्जा विभाग के MD प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति और पात्रता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में लंबे समय से नियमों की अनदेखी, कथित फर्जी दस्तावेजों और सेवा विस्तार के जरिए पदोन्नति हासिल करने जैसे मामलों पर शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बलूनी ने बताया कि इस मामलें में उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई जिसमें प्रकाश चंद्र ध्यानी की तकनीकी योग्यता, कथित फर्जी दस्तावेज, सेवा अभिलेखों में अनियमितता और UPSEB आदेशों की कूट रचना कर पदोन्नति हासिल करने जैसे गंभीर आरोप उठाए गए थे। उनका दावा है कि हाईकोर्ट ने 18 फरवरी 2026 के आदेश में संबंधित अधिकारी की तकनीकी पात्रता पर सवाल उठाते हुए उन्हें शीर्ष तकनीकी पद के लिए उपयुक्त नहीं माना था।
अनिल बलोनी के अनुसार, मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर SLP (C) No. 10495/2026 पर सुनवाई के दौरान भी अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अन्य गंभीर बिंदुओं पर उच्च न्यायालय के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी है। बलूनी का कहना है कि इसके बावजूद संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। यह भी आरोप लगाया गया है कि ऊर्जा विभाग की नियमावली में संशोधन कर तकनीकी पदों के लिए निर्धारित योग्यता में बदलाव किया गया, जिससे गैर-तकनीकी व्यक्तियों को भी पात्र बनाया गया। साथ ही अधिकतम आयु सीमा 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
वहीं, पिटकुल में करीब तीन वर्षों तक नियमित नियुक्तियां न होने और कई महत्वपूर्ण पदों के ‘प्रभार’ के आधार पर संचालन को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। एमडी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि चयन प्रक्रिया से जुड़ा एक कथित गोपनीय स्क्रूटनी दस्तावेज सार्वजनिक हुआ, जिसमें कुछ अधिकारियों को अपात्र और कुछ को पात्र घोषित किए जाने पर निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
अनिल चंद्र बलूनी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर ऊर्जा विभाग में नियुक्ति प्रक्रिया, नियम संशोधन,न्यायालयीय आदेशों के अनुपालन और लंबित शिकायतों के निस्तारण की भी मांग की है।




